हाले दिल कुछ तुम कहो कुछ हम कहें
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****
बहुत सुंदर
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ReplyDeleteकृपया मेरे ब्लाग पर भी पधारें
ReplyDeletepurushottamjeevankalash.blogspot.com
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