रिश्तों की भीड़ में ,
खुद को भुला दिया !
जा चुके थे लोग ,
देखा ,जब होश
आया हमें !
रिश्तों को बना कर खेल
जुआरी बन बैठे लोग
नफ़ा नुकसान की
बिछा चौपड़ ,
रिश्तों का दाँव लगा बैठे !
हिमाकत बस हमारी
इतनी सी
सोचा ज़रा बस
अपने लिए
अपनों ने हमें
दुश्मन बना लिया !!
*****नीता परिहार *****
खुद को भुला दिया !
जा चुके थे लोग ,
देखा ,जब होश
आया हमें !
रिश्तों को बना कर खेल
जुआरी बन बैठे लोग
नफ़ा नुकसान की
बिछा चौपड़ ,
रिश्तों का दाँव लगा बैठे !
हिमाकत बस हमारी
इतनी सी
सोचा ज़रा बस
अपने लिए
अपनों ने हमें
दुश्मन बना लिया !!
*****नीता परिहार *****