हौसलों की उड़ान
Sunday, 15 December 2013
.सुनहरी धूप
देखो ,ये वही धूप टुकड़ा
जो ले आये थे ...तुम
सुबह सुबह अंजुरी भर
जिससे मन ,दिल,और घर
सज गया था
सुनहरी रौशनी से
बंध गयी थी नई आशाएं
वो ख्वाब
अब भी उतने ही सुनहरे
जितना ये धूप का
टुकड़ा,याद है न तुम्हें
बोलो न .............
*नीता परिहार *
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