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Thursday, 5 December 2013

बात दिल की














सफर हो चाहे कितना ही मुश्किल
मंजिल तक पहुँचने के रास्ते है बहुत

 अश्को का दरिया ना बढ़ा इस कदर
 जीने के लिए मुस्कुराने की वजह है बहुत

तलाश रहा ख़ुशी तू दर बदर क्यूँ है
 झांक तू दिल के अन्दर ख़ुशी है बहुत

 कभी इस गली में रुख तू भी करना
 खुदा के घर तक गलियारे है बहुत

*नीता परिहार *

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