सफर हो चाहे कितना ही मुश्किल
मंजिल तक पहुँचने के रास्ते है बहुत
अश्को का दरिया ना बढ़ा इस कदर
जीने के लिए मुस्कुराने की वजह है बहुत
तलाश रहा ख़ुशी तू दर बदर क्यूँ है
झांक तू दिल के अन्दर ख़ुशी है बहुत
कभी इस गली में रुख तू भी करना
खुदा के घर तक गलियारे है बहुत
*नीता परिहार *
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