Monday, 23 May 2016
Tuesday, 1 March 2016
कुछ तो कहो
हाले दिल कुछ तुम कहो कुछ हम कहें
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****
हाले दिल
तन्हाई में मुझे रोना आता बहुत है !
बगीयों में खिले फूलों सी ,खुश रहूँ
पर जमाना मुझ पर हंसता बहुत है !
इश्क ने मुझे कही का न छोड़ा ,
दर्द ने तेरे, मुझे तड़पाया बहुत है !
भूल भी गया गर ,तू गम नही ,
खुश रह तू सदा मेरी दुआ बहुत है !
हाले दिल ,अब क्या बयाँ करें
खुश रहना नीता को आता बहुत है !
*****नीता परिहार *****
Sunday, 28 February 2016
जिन्दगी
कभी लंबी,तो कभी,छोटी लगती है जिंदगी !
यादों मे खुद को भुला बैठे,
कभी सुलझी,तो कभी उलझी
लगती है जिंदगी !
बड़ी ही शिकायत है
ज़माने को ज़माने से,
कभी मस्त तो कभी त्रस्त
लगती है जिंदगी !
जी लो जी भर के
थाम लो दामन खुशियों का,
जो कभी कठिन तो कभी हसीन
लगती है जिंदगी ☺
*****नीता परिहार *****
Monday, 21 September 2015
जीवन
रंग बिरंगे स्वप्न बुने थे,
हरे लाल ,कुछ नीले पीले,
फूलों और तितलियों जैसे,
कुछ उजास की भोर सरीखे,
शाम की कुछ सिन्दूरी धूप से,
ओस की बूंदों पर थे बिखरे,
झिलमिल करते रंगों को ही
मैंने जीवन माना था........
तुमसे मिलने के पहले
कब जीवन के रंगों को जाना
कहाँ समझ पाई थी प्रियतम
प्रेम का ये अनमोल खज़ाना
खुद में ही मुखरित होने को
मैंने जीवन माना था..
मैंने जीवन माना था..
*****नीता परिहार *****
Monday, 3 August 2015
Monday, 20 July 2015
Monday, 6 April 2015
बंधन
ये रूहों का ही तो बंधन है
जाने कितने जन्मों
से मिल रहे हम। ।
ऐसी क्या बात थी
चाहे भी तो जुदा
न हुए हम.।
मुश्किल थी बड़ी
बिछड़े थे जब
जमाने से हम। ।
न तुझको न मुझको
ही पता था
इस तरह मिलेंगे हम.।
वक्त का चक्र
तो चलता ही रहेगा
दो जिस्म
मगर एक जान
रहेंगे हम.…
जाने कितने जन्मों
से मिल रहे हम। ।
ऐसी क्या बात थी
चाहे भी तो जुदा
न हुए हम.।
मुश्किल थी बड़ी
बिछड़े थे जब
जमाने से हम। ।
न तुझको न मुझको
ही पता था
इस तरह मिलेंगे हम.।
वक्त का चक्र
तो चलता ही रहेगा
दो जिस्म
मगर एक जान
रहेंगे हम.…
Wednesday, 25 March 2015
मुक्तक
चार कदम इनकी ओर बढ़ा कर तो देखो
एक नजर इनकी ओर उठा कर तो देखो
खिल जायेगी इनकी जिंदगी फूलों सी
एक बार इनको गले से लगा कर तो देखो
एक नजर इनकी ओर उठा कर तो देखो
खिल जायेगी इनकी जिंदगी फूलों सी
एक बार इनको गले से लगा कर तो देखो
Sunday, 15 March 2015
रंग बदलते रिश्ते
रिश्तों को महकते देखा है, हर रंग घुमड़ते देखा है. दिल में रहता था प्यार कभी, नफ़रत में बदलते देखा है. ऊंचे ऊंचे कद वालों का, ईमान भी गिरते देखा है महफ़िल में भी अक्सर उनको, तन्हा ही तड़पते देखा है. मुस्कान लबों पे आई तो, रूहों को मचलते देखा है. जब जब मैं घिरी हूँ मुश्किल में, अपनों को हँसते देखा है. क्या बात करें दुनिया की अब, तुमको को भी बदलते देखा है कुछ देर तलक वो साथ चले, फिर उनको बिछड़ते देखा है
*****नीता परीहार *****
Thursday, 12 March 2015
तन्हाई
हम तुम से रूठे रहे
यूँ तुम अब मनाने से रहे
रात गुजारी राह में तेरी
घर तुम अब आने से रहे
रात कट गई आंसू बहते रहे
तुम हमें अब बहलाने से रहे
चले जाओ दूर चाहे तुम
हम तुम्हे अब भुलाने से रहे
चाहे लगाओ गुहार कितना
हम दिल अब लगाने से रहे
*****नीता परिहार *****
Wednesday, 11 March 2015
बेबसी
मेरे लिए तुम्हारा
बेख्याली , बेगानगी (indifference)
बेपरवाह ,बेज़ार
होना पसंद आया
मुझे। ……
बदले में यही सब
बेहिसाब दूंगी तुम्हे
महसूस करोगे
उस दिन
मुझे। .............
बेइख्तियार हो के (असहाय)
रहेगा दिल तुम्हारा
बेकरार होकर
मिलने आओगे
मुझे। ………
बेगुनाह ,बेकसूर
थी मैं ,किस
बात की बेरुखी दी
मुझे। …………
अब बेखुदी में (senselessness )
जियो तुम
भुला कर
मुझे। ……
भूली बिसरी यादों में
एक घडी बेख्वाबी की (sleeplessness )
देखना तुम
मुझे……।
हाँ फिर भी कहूँगी
बेपनाह (extreme )मोहब्बत है
मुझे। ……।
*****नीता परिहार *****
बेख्याली , बेगानगी (indifference)
बेपरवाह ,बेज़ार
होना पसंद आया
मुझे। ……
बदले में यही सब
बेहिसाब दूंगी तुम्हे
महसूस करोगे
उस दिन
मुझे। .............
बेइख्तियार हो के (असहाय)
रहेगा दिल तुम्हारा
बेकरार होकर
मिलने आओगे
मुझे। ………
बेगुनाह ,बेकसूर
थी मैं ,किस
बात की बेरुखी दी
मुझे। …………
अब बेखुदी में (senselessness )
जियो तुम
भुला कर
मुझे। ……
भूली बिसरी यादों में
एक घडी बेख्वाबी की (sleeplessness )
देखना तुम
मुझे……।
हाँ फिर भी कहूँगी
बेपनाह (extreme )मोहब्बत है
मुझे। ……।
*****नीता परिहार *****
Tuesday, 10 March 2015
Tuesday, 3 March 2015
होली
होली आई तो सखी … गाल हो गये लाल
आज खूब हो रही ….... मस्ती और धमाल
मस्ती और धमाल …भांग की खाई गुझिया
गुल है सारे फ्यूज़ …गोल लगती है दुनियां
================================
बात बात में हो रही ....रंगों भरी ठिठोली
बिन पिचकारी खेलती …शब्दों के संग होली
शब्दों के संग होली …याद है सब ऐसे ही
खेली थी उस साल सदा खेलूं वैसे ही ...
*****नीता परिहार *****:)
Monday, 16 February 2015
दस्तूर
नये ज़माने का अजब दस्तूर है
बेगाने अपने हुए,और अपने दूर है
कर दिया हर एक रिश्ता दरकिनार
किस नशे में आज इन्सां चूर है
कौन सुनता फिर गरीबों की वहाँ,
हुक्मराँ खुद ही यहां मगरूर है.
मिल रहे तमगे किसी को और, इक,
बच्चा यहां पर आज भी मजदूर है .
बात तो करते हैं सब देखो बड़ी,
ज़िन्दगी जीने को पर, मजबूर है
मुल्क़ में खुशहाली की किसको पडी,
देखना सबको ही अपना नूर है..
*****नीता परिहार *****
बेगाने अपने हुए,और अपने दूर है
कर दिया हर एक रिश्ता दरकिनार
किस नशे में आज इन्सां चूर है
कौन सुनता फिर गरीबों की वहाँ,
हुक्मराँ खुद ही यहां मगरूर है.
मिल रहे तमगे किसी को और, इक,
बच्चा यहां पर आज भी मजदूर है .
बात तो करते हैं सब देखो बड़ी,
ज़िन्दगी जीने को पर, मजबूर है
मुल्क़ में खुशहाली की किसको पडी,
देखना सबको ही अपना नूर है..
*****नीता परिहार *****
खामोशियाँ
खामोशियाँ भी बोलती है
दूर होते हुए,
कोलाहलों में भी
मौन की गूंज
अल्फाजों में सुनाई देती है,
तुम्हारी उदासी को,
ख़ुशी को,मौसम से
हमेशा बातें करते सुना
दिल की बातें दिल तक
पहुंचकर ही शुकून
पातीं हैं.……
देखो,चलीं बसंती हवाएं
चारों तरफ खिले
"नारंगी पलाश "
अभी अभी
तुम्हें कहते सुना
लग रहा न जंगल में
आग लगी।
*****नीता परिहार *****
१६ /२ /२०१५
Tuesday, 27 January 2015
Sunday, 11 January 2015
क्षणिकाएं
कड़ाके की ठण्ड में
सडको पर
सिग्नल पर
कार के पास दौडती
दो रोटी के लिए
हाथ फैलाती जिन्दगी
कभी रोती
कभी मुस्काती
गुनगुनी ताप लिए
कब नया दिन
निकलेगा।
***नीता परिहार ***
सडको पर
सिग्नल पर
कार के पास दौडती
दो रोटी के लिए
हाथ फैलाती जिन्दगी
कभी रोती
कभी मुस्काती
गुनगुनी ताप लिए
कब नया दिन
निकलेगा।
***नीता परिहार ***
Tuesday, 30 December 2014
सिली यादें
ठिठुरती ठण्ड में,
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया जीवन दे जाना
*****नीता परिहार *****
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया जीवन दे जाना
*****नीता परिहार *****
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